Akhil Bharatiya Mahajan Parivar

हम केवल आश्वासन नहीं देते, हम परिणाम देते हैं। 'संग्राम सेना' और 'महाजन परिवार' का इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज पर संकट आया, हम दीवार बनकर खड़े रहे। हमारी सेवा यात्रा मुख्य रूप से चार क्षेत्रों में विस्तारित है

सामाजिक उत्थान एवं मानव सेवा (नर सेवा ही नारायण सेवा है)

समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचाना हमारा ध्येय है।

  1. महामारी में मानवीय सहायता: वर्ष २०२० के कोरोना काल में, जब दुनिया घरों में कैद थी, तब हमने साबरमती विधानसभा और पूरे अहमदाबाद में जाति-धर्म का भेद मिटाकर २२,००० परिवारों तक राशन किट पहुँचाई।
  2. अन्नदान महादान: ‘कोई भूखा न सोए’ के संकल्प के साथ, साबरमती क्षेत्र की गरीब बस्तियों और चालियों में रहने वाले १४,५०० परिवारों को लगातार ५ वर्षों तक रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया।
  3. न्याय और सम्मान की रक्षा: ‘लव-जिहाद’ और विधर्मी षड्यंत्रों की शिकार हुई युवतियों और विवाहित स्त्रियों को न केवल सुरक्षित बचाया, बल्कि उन्हें समाज में पुनः सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया।
  4. बिल्डर माफिया के विरुद्ध संघर्ष: आम आदमी की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले, प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ने वाले बिल्डरों और भू-माफियाओं से कड़ा संघर्ष कर सोसायटी के सदस्यों को उनका हक और बड़ा मुआवजा दिलवाया।
  5. अंतरराष्ट्रीय बेटी बचाओ अभियान: जर्मनी में फंसी भारत की १८ महीने की बेटी ‘अरिहा’ को वतन वापस लाने के लिए देश-विदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ा। गुजरात सरकार द्वारा पहली बार संस्था को ‘फास्टर फैमिली’ (पालक परिवार) के रूप में पंजीकृत करवाया।

व्यापारिक सुरक्षा एवं स्वाभिमान (व्यापारी ही राष्ट्र की रीढ़ है)

व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण देना हमारा कर्तव्य है।

  1. छोटे व्यापारियों की ढाल: मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे दुकानदारों की आजीविका बचाने के लिए, हमने ‘बड़े मॉल’ (Mall Culture)के एकाधिकार के विरुद्ध एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा किया।
  2. धोखाधड़ी से मुक्ति: विश्वासघात और धोखाधड़ी के शिकार व्यापारियों को न्याय दिलाया। माल लेकर पैसा हज़म करने वाले तत्वों से सख्ती से निपटकर पीड़ितों को उनकी फंसी हुई रकम वापस दिलवाई।
  3. गुंडागर्दी का अंत: व्यापारियों को डरा-धमका कर किश्तें वसूलने वाले रिकवरी एजेंटों और असमाजिक तत्वों पर नकेल कसी।
  4. आर्थिक राहत: आर्थिक मंदी या संकट के कारण बैंकों का ऋण (Loan) चुकाने में असमर्थ व्यथित व्यापारियों के लिए बैंकों के साथ मध्यस्थता (Mediation) कर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की।

धर्म एवं संस्कृति रक्षण (धर्मो रक्षति रक्षितः)

संस्कृति बचेगी, तभी राष्ट्र बचेगा।

  1. तीर्थों की पवित्रता: पालीताना महातीर्थ में जैन और सनातन धर्म के बीच उत्पन्न विवादों को संवाद और मध्यस्थता के जरिए सुलझाया। संतों पर हमले के बाद, अकेले वहां जाकर शांति और सौहार्द स्थापित किया।
  2. मंदिरों का जीर्णोद्धार:  साबरमती और राजस्थान में जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का नवनिर्माण करवाया। धार्मिक त्योहारों और साधु-साध्वियों की पदयात्राओं को पूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान किया।
  3. संत सुरक्षा: पूज्य साध्वी ऋतंभरा जी और आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज जैसे राष्ट्र-संतों की सुरक्षा व्यवस्था संभाली और उनकी विशाल धर्मसभाओं का सफल संचालन किया।
  4. विधर्मियों का प्रतिकार:  असामाजिक तत्वों द्वारा साधु-साध्वियों को परेशान करने या धमकाने की घटनाओं का कड़ा विरोध किया और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

जीवदया एवं गौ-सेवा (अहिंसा परमो धर्मः)

मूक प्राणियों की पीड़ा हरना हमारा सबसे बड़ा धर्म है।

  1. अवैध कत्लखानों पर प्रहार: रातों-रात हाइवे पेट्रोलिंग कर अवैध बूचड़खानों (Slaughterhouses) के चंगुल से हज़ारों गायों और मूक प्राणियों को जीवनदान दिया।
  2. साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन:  अपनी जान की परवाह किए बिना, साबरमती रेलवे ट्रैक और हाइवे पर कत्लखाने जा रहे मवेशियों से लदे ट्रकों और मालगाड़ियों को रुकवाकर हज़ारों बेजुबान जानों को अभयदान दिया।
  3. पांजरापोल सेवा: मुक्त कराए गए पशुओं को सुरक्षित पांजरापोल (गौशाला) पहुँचाने की व्यवस्था की।
  4. ऐतिहासिक अनशन: गुजरात को ‘अहिंसा राज्य’ घोषित करने की मांग को लेकर आर.टी.ओ. सर्कल, सुभाषब्रिज पर १० दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल और धरना दिया।
फुटर नोट (अंतिम पंक्ति): "हम समस्याओं को केवल गिनते नहीं, उनका समाधान करते हैं। यही संग्राम सेना का संकल्प है।"